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Leucotreat

Leucotreat

Description

 

Common symptoms of white tissue: - The only common symptom of white discharge is the abnormal white secretion from the vaginal, n there is no specific Pain, burning or any other symptoms. In modern science, it is known as Leucorrhoea.

Types of Leucorrhoea: - Generally there are 4 types of Leucorrhoea :

1. Vulvar Leucorrhoea:- Usually found in young age girls.

2. Vaginal Leucorrhoea:- Usually found in young age women’s.

3. Cervical Leucorrhoea(Cervix):- Usually found in pregnant women.

4. Uterine Leucorrhoea (Uterus):- Usually found in pregnant women.

Causes of disease: - Usually the main reason for having leucorrhoea in women is an Unbalanced diet and irregular lifestyles. for this reason, the body does not get enough nutrients and this irregularity appears as a physical disorder.

Leuco treat Medicine description: - Luecotreat(leucorrhoea treatment in Ayurveda) is made of extremely rare & precious herbs. patients suffering from this disease get results within a few days by taking this with the following precaution. While taking medication, it is mandatory to avoid some following foods as per the instruction.

Abstinence (परहेज): - Curd, papad, pickle, sour (raw mango), Pani Puri, sweet.

Tip: - Take the medicine with half cup boiled rice water + 1 teaspoon honey, take it in a specific ratio.

Consuming procedure: - Take leuco-treat twice a day, after 1 hour from having your lunch and dinner. for that take the half cup (boiled/cooked rice water) + 1 Teaspoon pure honey make a mixture of it, and then mix 1 teaspoon (approx 2-3 gm) of leuco-treat medicine to it and then consume it.

श्वेत प्रदर के सामान्य लक्षण: श्वेत प्रदर का एक मात्र लक्षण योनिपथ से असामान्य श्वेत स्राव का होना है इसमें कोई विशिष्ट वेदना, जलन या कोई अन्य लक्षण उजागर नहीं होते है आधुनिक विज्ञान में इसे Leucorrhoer के नाम से जाना जाता है |

ल्यूकोरिया के भेद: - यह 4 प्रकार का होता है

1) Vulvar Leucorrhoea (भगज) - प्रायः काम उम्र की बालिकाओं में |

2) Vaginal Leucorrhoea (योनिज) - प्रायः तरुण स्त्रियों में |

3) Cervical Leucorrhoea (ग्रीवा)- प्रायः गर्भवती महिलाओं में |

4) Uterine Leucorrhoea (गर्भाशयज )- प्रायः गर्भवती महिलाओं में |

रोग होने के करण:- सामान्यतः महिलाओं को ल्यूकोरिया होने का प्रमुख कारण है असंतुलित आहार और अनियमित जीवन शैली है जिससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते है और यह अनियमितता शारीरिक विकार के रूप में प्रकट होती है |

ल्यूकोट्रीट औषधि: - ल्यूकोट्रीट(leucorrhoea treatment in ayurveda) अत्यंत दुर्लभ जड़ी बूटियों के योग से बनी औषधि है इसे रोग से पिडित रोगी को परहेज के साथ लेने से कुछ ही दिनों में फायदा मिल जाता है इस औषधि को लेते वक़्त कुछ खाद्य पदार्थो का परहेज नियम से करना अनिवार्य होता है |

परहेज: - दही, पापड़, अचार, खटाई ,पानी पूरी, मिठाई अनुपान : चावल का मांड (उबले हुवे चावल का पानी) + एक चम्मच शहद के साथ एक विशिष्ट अनुपात में ही लेना है|

सेवन विधि: - ल्यूकोट्रीट का सेवन दिन में २ बार भोजन के लगभग १ घंटे बाद करना है इसके लिए आधा कप चावल के मांड में एक चम्मच शुद्ध शहद का मिश्रण बना कर उसमे एक चम्मच (लगभग २-३ ग्राम) दवा मिला कर इसका सेवन करना है |